पिता करते थे मजदूरी, चाय बेचकर चलाया गुजारा, अब IAS बन रोशन किया परिवार का नाम

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संजय कपूर
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आज ज़्यादातर युवाओं का सपना UPSC पास कर बड़ा अधिकारी बनने का है। इस परीक्षा को पास करने के लिए परीक्षार्थी कड़ी मेहनत भी करते हैं। लेकिन कई बार सफलता मिलने में काफी लंबा समय भी लग जाता है। वहीं कुछ ऐसे भी परीक्षार्थी हैं जो तमाम मुश्किलों का सामना करते हुए इस परीक्षा को देते हैं और सफलता को भी हासिल कर लेते हैं।

ऐसे ही एक अफसर की कहानी आज हम आपको बताने जा रहे हैं। इनका नाम हिमांशु गुप्ता है। हिमांशु ने गरीबी में अपने दिन काटे हैं। उनके पिता मजदूरी करके और चाय बेचकर गुजारा चलाते थे। इसके बावजूद हिमांशु के पिता ने बच्चों की पढ़ाई पर कोई आंच नहीं आने दी। आज IAS अफसर बन हिमांशु ने अपने परिवार का नाम रोशन कर दिया है।

चाय की दुकान और मजदूरी से चलता था घर

आज भी हमारे सामने ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं जिसमें कई लोगों ने अपने सपने को पूरा करने के लिए कई बलिदान दिए हैं और सफलता को हासिल भी किया है। इन्हीं में से एक की कहानी आज हम आपको बताने जा रहे हैं। ये शख्स कोई और नहीं बल्कि IAS अफसर हिमांशु गुप्ता है। हिमांशु ने तमाम मुश्किलों और असफलताओं का सामना करने के बाद इस मक़ाम को हासिल किया है।

हिमांशु के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। स्कूल पढ़ने के लिए हिमांशु को 35 किमी दूर जाना पड़ता था। स्कूल के लिए हिमांशु आना जाना मिलाकर 70 किमी का सफर तय किया करते थे। इसके लिए वे अपने साथियों के सतह वैन में जाया करते थे। उनके पिता एक दिहाड़ी मजदूर थे और चाय का ठेला भी चलाते थे। ऐसे में एक बार उन्हें उनके साथियों ने देख लिया जिसके बाद हिमांशु का मज़ाक भी बनाया गया। लेकिन हिमांशु सिर्फ अपनी पढ़ाई पर ध्यान देते थे

कड़ी मेहनत से कॉलेज में किया टॉप

हिमांशु के परिवार में सब मेहनत करने के बाद कुल मिलाकर 400 रूपये कमा लेते थे। हिमांशु के पिता ने हमेशा से ही हिमांशु को समझाया था कि सपने पूरे करने के लिए पढ़ना बेहद जरूरी है। वहीं हिमांशु को अंग्रेजी नहीं आती थी ऐसे में उन्हें कॉलेज में दाखिला लेना भी काफी मुश्किल लगता था। तब हिमांशु अंग्रेजी फिल्मों की डीवीडी देखकर अंग्रेजी सीखते थे। कड़ी मेहनत के बाद उन्हें हिंदू कॉलेज में दाखिला मिला।

हालांकि यहाँ भी हिमांशु के लिए तालमेल बिठा पाना काफी मुश्किल था लेकिन हिमांशु ने हार नहीं मानी। उन्होंने इस दौरान ट्यूशन भी पढ़ाया और ब्लॉग लिखकर कमाई की ताकि परिवार पर पढ़ाई का ज़ोर न पड़े। कड़ी मेहनत से हिमांशु ने टॉप भी किया और मास्टर्स की पढ़ाई भी पूरी की। ऐसे में उन्हें पीएचडी के लिए छात्रवृत्ति का भी ऑफर मिला जिसे उन्होंने ठुकरा दिया।

ऐसा रहा UPSC का सफर

बता दें कि हिमांशु ने पीएचडी करने के बजाए UPSC की तैयारी कर अफसर बनने का फैसला किया। हिमांशु को पहले ही प्रयास में असफलता मिली थी लेकिन इससे वे घबराए नहीं। 2018 में हिमांशु ने वापस से परीक्षा दी जिसमें उन्हें IRTS सर्विस मिली। इसके बाद 2019 में एक बार फिर उन्होंने IAS बनने का प्रयास किया लेकिन इस बार उन्हें IPS सर्विस मिली।

ऐसे में भी हिमांशु ने अपना प्रयास करना नहीं छोड़ा। 2020 में उन्होंने वापस से प्रयास किया जिसमें उनका सपना पूरा हुआ और उन्हें IAS सर्विस मिली। आज हर कोई हिमांशु के जज़्बे और कड़ी मेहनत को सलाम कर रहा है।

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