हरियाणा में हुआ शानदार आविष्कार, अब आम आदमी बना पाएगा गोबर की ईट, सीमेंट और रोड़ी से सस्ता मकान

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पुलकित कपूर
पुलकित कपूर
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रोहतक:हरियाणा के एक वैज्ञानिक ने ऐसा रास्ता निकाला है, जिससे अब लोग बेहद सस्ते में अपने घर बना पाएंगे। इस वैज्ञानिक ने इको फ्रैंडली तरीके से इस घर का निर्माण किया है। हैरत की बात है कि जहां गर्मियों में यह घर एयर कंडीशन जैसा कूल रहेगा, वहीं सर्दियों के मौसम में लोग गर्माहट वाले मकान में बेहद आराम से रह सकेंगे। इस घर में गांव की मिटटी की सौंधी खूश्बू किसी का भी मन मोह लेगी। यह घर ना केेवल प्रकृति का आनंद देगा, वहीं स्वास्थ्य वर्धक भी होगा। इस घर में रहने वाले लोग प्रदूषित माहौल से बचे रहेंगे, जिससे उन्हें प्रदूषण की वजह से होने वाली बीमारियां नहीं लगेंगी। इस घर ना केवल बेहद सस्ता होगा, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से वहां रहने वालों के लिए वरदान से कम नहीं होगा।

हरियाणा कृषि रत्न से सम्मानित हुए

इस घर का निर्माण रोहतक के रहने वाले 53 वर्षीय वैज्ञानिक डा. शिव दर्शन मलिक ने किया है। इस घर को बनाने के लिए उन्होंने ऐसा अनोख अविष्कार किया है, जोकि सभी को हैरान कर देने वाला है। बता दें कि श्री मलिक ने इस विशेष घर के लिए गोबर से वैदिक प्लास्टर का निर्माण किया है, जिससे इस कूल और प्रदूषित रहित घर का निर्माण किया है। इस शानदार अविष्कार के लिए डा. मलिक को वर्ष 2019 में हरियाणा कृषि रत्न से नवाजा जा चुका है। इसके लिए उन्हें खूब सराहना भी मिली है और लोग उनकी तकनीक को आने वाले समय के लिए वरदान मान रहे हैं।

#POSITIVE_NEWS हरियाणा का #शिव_दर्शन रिसर्च स्कॉलर, गाय के गोबर से बनाता है सीमेंट और ईंट; सालाना टर्नओवर 50 लाख, सैकड़ों किसानों को भी रोजगार से जोड़ा है। ईको फैन्डली मकान देखकर 2005 से इस कार्य योजना में लगा।

गोबर से बनाया बिल्डिंग मैटीरियल

बता दें कि डा. मलिक रोहतक जिले के गांव मदीना के रहने वाले हैं। वह अपने इस अनोखे अविष्कार के माध्यम से गोबर से सीमेंट, र्इंट और पेंट का निर्माण कर चुके हैं। अब वह इस कार्य को आगे बढ़ाने के लिए लोगों को प्रशिक्षित कर रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग इस बेहद सस्ती निर्माण सामग्री के प्रति जागरूक होकर ईको फै्रंडली तरीके से अपने घर का निर्माण कर सकें। यह भी किसी से छिपा नहीं है कि घर के निर्माण हेतु प्रयोग किए जाने वाले मैटीरियल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ईंट से लेकर रेता, बजरी, रोडी, डस्ट तथा सीमेंट की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी को इस लायक नहीं छोड़ा है कि वह अपना छोटा सा घर भी बना सके। हर रोज निर्माण सामग्री की कीमतों मेें इजाफा हो रहा है। इसे देखते हुए ही डा. मलिक ने आम आदमी के लिए ऐसा अविष्कार किया है, ताकि वह बेहद सस्ते में अपना घर बना सके।

अमेरिका और इंगलैंड से लाए तकनीक

डा. मलिक एक रिसर्च के लिए वर्ष 2005 में अमेरिका और इंगलैंड गए थे। वहां उन्होंने ईको फै्रंडली घर बनाने के तरीकों का अध्ययन किया और वहां से ही वह इस नई तकनीक को अपने साथ भारत ले आए। डा. मलिक ने गोबर को ईको फैं्र डली घर बनाने के लिए चुना। वैसे भी इन दिनों गांवों में गोबर गैस का अधिक मात्रा में इस्तेमाल हो रहा है, जिसके बाद उपलों का इस्तेमाल काफी हद तक कम हो गया है। इससे गोबर की मात्रा अधिक बढ़ रही है। इस पर ही उन्होंने रिसर्च किया तो पता चला कि गोबर में थर्मल इंसुलेटेड पदार्थ होता है, जोकि गर्मियों में ठंडा और सर्दियों में गरम रहता है। गोबर का इस्तेमाल घरों की पुताई में भी किया जाता है।

प्रकृति अनुकूल है गोबर

इसके बाद डा. मलिक ने अपनी तकनीक से गोबर को ईंट, सीमेंट और पेंट बनाने में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। उनका यह अविष्कार पूरी तरह से सफल रहा और इससे घर बनाने का काम शुरू किया। इस कुदरती घर में बिजली की खपत भी ना के बराबर होती है। गोबर की ईंट बनाने में वह चूने का उपयोग भी करते हैं। गर्मियों में गोबर की बिल्डिंग मैटीरियल से बनने वाले घर में इतनी ठंडक रहती है कि वहां एसी की जरूरत नहीं होती। वह अब तक राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र व झारखंड में 100 से ज्यादा लोगों को प्रशिक्षित कर चुके हैं। उनका मानना है कि आने वाले कुछ समय में उनका यह प्रयोग हर आदमी के घर बनाने के काम आने वाला है।

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