लेबर का काम किया, सड़कों पर पैन बेचकर चलाया गुजारा, आज बन चुके हैं देश के सबसे बड़े कॉमेडियन

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पुलकित कपूर
पुलकित कपूर
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New Delhi: जॉनी लीवर को आज हर कोई जानता है। जॉनी की कॉमेडी वाकई हर किसी को हंसने पर मजबूर कर देती है। शुरुआत से ही उन्हें कॉमेडी करने का बेहद शौक था। लेकिन आज उन्हें कॉमेडी का किंग कहा जाता है। कई फिल्मों में काम कर जॉनी ने खूब सुर्खियां बटोरी और हर किसी का दिल जीत लिया। लेकिन जॉनी के यहाँ तक का सफर आसान नहीं था। जॉनी ने तमाम मुश्किलों के बाद ये मुकाम हासिल किया है।

एक समय था जब जॉनी ने पैन बेचकर अपना गुजारा चलाया वहीं उन्होंने फैक्ट्री में लेबर का काम भी किया था। लेकिन आज वे कड़ी मेहनत से सफलता को हासिल कर चुके हैं। आज उनकी कहानी कई लोगों के लिए प्रेरणा भी बन चुकी है। आइए जानते हैं जॉनी लीवर के बारे में।

आत्महत्या करने का लिया था फैसला

जॉनी लीवर का जन्म 14 अगस्त 1957 को मुंबई में ही हुआ था। पैदा होने के बाद उनका नाम जॉन राव रखा गया जो बाद में जॉनी लीवर हो गया। बचपन से ही जॉनी के परिवार की आर्थिक स्थिति बिल्कुल भी अच्छी नहीं थी। वहीं समय के साथ उनकी माली हालत ठीक होने के बजाए खराब हो गई। इसी के चलते उन्हें स्लम में भी रहना पड़ा था। जॉनी के पिता हिंदुस्तान लीवर में काम किया करते थे लेकिन सारा पैसा शराब पीने में ही उड़ा देते थे।

वहीं उनके पिता घर पर भी झगड़ा करते थे और मोहल्ले में भी झगड़ते थे। ऐसी जिंदगी से जॉनी काफी परेशान हो गए थे तब उन्होंने आत्महत्या करना का सोचा और ट्रेन की पटरी पर जाकर लेट गए। लेकिन तभी उनके सामने अपने परिवार का चेहरा आया जिसके बाद वे पटरी से खड़े हुए और कुछ करने का फैसला कर लिया। उस वक़्त जॉनी सिर्फ 13 वर्ष के ही थे।

पैन बेचकर चलाया गुजारा

7वीं कक्षा में ही जॉनी की पढ़ाई बंद हो चुकी थी। लेकिन बचपन से ही उन्हें लोगों को हंसाना काफी पसंद था। इसलिए वे गली मोहल्ले में कोई भी कार्यक्रम होता था तो कॉमेडी और डांस करने के लिए चले जाया करते थे। इसके लिए उन्हें उस समय 1-2 रूपये भी मिल जाते थे। वहीं उनके घर के पास एक सिंधी कैंप था जहां दो लोग मिमिक्री सिखाया करते थे। जॉनी ने भी यहाँ मिमिक्री सीखना शुरू किया। लेकिन तभी उन्हें वहाँ बैठे एक शख्स ने इन दो लोगों के साथ न जुड़ने की सलाह दी।

उसने कहा कि ये दोनों तुम्हें शराबी बना देंगे। जब जॉनी ने पूछा कि उन्हें क्या करना चाहिए तब उसने जॉनी को पैन बेचने की सलाह दी। ऐसे में जॉनी ने भी सड़कों पर पैन बेचना शुरू कर दिया। इस काम में भी उन्होंने मिमिक्री के सहारे बिक्री करने की कोशिश की। जिससे उनका काम अच्छा हुआ। लेकिन धीरे धीरे ये काम भी बंद हो गया था।

जॉन राव ऐसे बना जॉनी लीवर

दरअसल 18 वर्ष के होने से पहले जॉनी ने खूब इधर उधर कॉमेडी की थी। लेकिन 18 के होते ही अब जॉनी के पिता ने उन्हें भी हिन्दुस्तान लीवर में लगा दिया था। यहाँ उन्हें मजदूर के तौर पर काम किया था। लेकिन कभी कभी वे यहाँ से भी छुट्टी मारकर स्टेज शो करने के लिए जाया करते थे। लेकिन उनके पिता को ये बात बिल्कुल भी पसंद नहीं थी। ऐसे में एक बार जॉनी के पिता भी लाइव शो में पहुँच गए और उन्होंने देखा कि उनके बेटे की कॉमेडी पर लोग ज़ोर ज़ोर से हंस रहे हैं। ऐसे में जॉनी भी अपने पिता के डर से दोस्त के घर छिप गए थे।

वहीं एक बार जॉनी की कंपनी में भी एक कार्यक्रम चल रहा था। ऐसे में कई लोगों ने उन्हें मिमिक्री करने के लिए कहा। तब जॉनी ने अपने ऑफिस स्टाफ की नकल की थी जो उनके बॉस को भी खूब पसंद आई। तभी यूनियन लीडर सुरेश आए और उन्होंने ही जॉनी को जॉनी लीवर नाम दिया।

ऐसे मिला फिल्मों में काम

इस कंपनी में जॉनी ने 6 साल तक काम किया था। इसके बाद वे अपना सारा समय कॉमेडी को देने लगे। कुछ समय बाद जॉनी ने सोनू निगम के पिता अगम निगम के साथ शोज़ भी किए। ऐसे में धीरे धीरे वे इस इंडस्ट्री में अपना नाम बनाने लगे। ये वो वक़्त था जब जॉनी स्टेज शो के 30 रूपये लिया करते थे। एक बार कल्याण जी आनंद जी का शो शुरू होने ही वाला था कि तभी वहाँ शत्रुघ्न सिन्हा आ गए।

हैरानी वाली बात तो ये थी कि उन्होंने कहा कि मुझे सिर्फ जॉनी लीवर को देखना है। ऐसे में जॉनी ने भी उनकी नकल उतारी जिससे शत्रुघ्न सिन्हा काफी प्रभावित हुए। इसके बाद सुनील दत्त कि नज़र भी जॉनी पर पड़ी और वे उस समय फिल्म भी बना रहे थे। जॉनी के हुनर को देखते हुए सुनील ने उन्हें 1982 में आई फिल्म “दर्द का रिश्ता” में चुन लिया गया। इसके बाद से जॉनी ने कई बड़ी फिल्मों में काम किया।

जॉनी के लिए कोई फिल्ममेकर नहीं लिखता था रोल्स

अपनी पहली फिल्म के साथ जॉनी का फिल्मी करियर शुरू हुआ लेकिन आगे बढ़ने में अभी भी कई परेशानी आ रही थी। इसके बाद जॉनी ने तेजाब, जलवा, जादूगर, चालबाज़, खिलाड़ी जैसी कई फिल्मों में काम किया लेकिन करियर रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा था। लेकिन इसके बाद जॉनी ने 1993 में फिल्म “बाज़ीगर” में काम किया। इस किरदार को दर्शकों ने खूब पसंद किया था।

लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इस फिल्म में जॉनी के लिए एक भी डायलॉग नहीं लिखा गया था। दरअसल फिल्म में जो भी जॉनी ने बोला है वो उनके दिमाग की उपज ही है। जो भी जॉनी को परिस्थिति के अनुसार सही लगा वो उन्होंने बोल दिया था। वहीं अनाड़ी नंबर 1 में भी जॉनी ने खुद ही अपने दिमाग से डायलॉग बोले थे। ये जॉनी की आदत बन चुकी थी इसलिए कोई भी फ़िल्ममेकर उनके लिए डायलॉग लिखता ही नहीं था। आज भी जॉनी लीवर कॉमेडी के क्षेत्र में दर्शकों की पहली पसंद बने हुए हैं।

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